Friday, May 9, 2008

feeling of love..........

रात को जब तेरी याद आने लगी!
आँखे आशुओ से दब्दबने लगी !!
वक्त रुक सा गया था बस उस घड़ी!
साँस आने से पहले ही जाने लगी!!
सुबह का था हमको टैब इंतजार !
मगर वक्त की थी बहुत धीमी रफ्तार !!

दर्द से हम उही मचलते रहे!
रह रह के उन्हें याद करते रहे!!
सच कहूँ , तो मैंने ये सोछा ना था!
रात ऐसे कटेगी पता ही ना था !!

जब सबेरा हुआ रोशनी सी दिखी !
मन मे एक अजब सी खुसी मिली!!

रात को जब तेरी याद आने लगी !
आँखे अंशु से दुब्दाबने लगी!!



night can be so painful and long ....i reallies after this night..


change is rule of nature..........

कुछ तो हुआ है,वो दिखाने लगा है!
राज दिल मे था जो,वो खुलने लगा है!!
छिपाये हम उस राज को कैसे ,अदाओ हमारी जो दिखाने लगा है!!
गए हम बदल सबको लगाने लगा है!
राज दिल मी था जो वो, खुलने लगा है!!
हमने ये मन की ,कुछ तो हुआ है!
हमको है मालूम ये किसकी खाता है!!
.......दोस्तो अब मैं ख़ुद मे रहने लगा हूँ!
खुदी ख़ुद से बाते मैं करने लगा हूँ!!
नही है कोई आदि अंत इसका!
मैं एक बिन्दु बस मे रमने लगा हूँ!!

कुछ तो हुआ है, वो दिखने लगा है!
राज दिल मे था जो, वो खुलने लगा है!!


.............................................!!!!!!!!!!!!!! dil ki awaj .......................

dost se bichhadane ka gum.....

दिल का समुन्दर है गहरा बारा !
तुम इससे बच के रहना जरा!!
कहीं दूर तुमको ये लेजयेगा !
हमे तुमको दुन्धना पड़ जाएगा!!
अश्को का लेंगे सहारा तब हम !
यूँही वक्त अब तोः गुजरेंगे हम!!

दिल का समुन्दर है गहरा बारा !
तुम इससे बच के रहना जरा!!
वक्त इस रफ्तार से निकल जाएगा !
देखते -२ जाने का वक्त आ जाएगा!!
ये सोचकर दिल धड़कने लगा!
बगावत कराने को दिल मचलने लगा!!
तुम्हारी याद फ़िर से आने लगी!
आँखे आशुओ से दुब्दाबने लगी!!

दिल का समुन्दर है गहरा बारा !
तुम इससे बचा के रहना जरा!!


don't feel it.........just enjoy it.....

Monday, April 7, 2008

आंखो मे अंशु और मन मे है आशा !
क़रता है मेहनत और खाता है झांषा !!
कैसे बताऊ क्या है इनकी परिभाषा!
करता है मेहनत और खाता है झांषा!!
अपने नेताओ से है मुझको निराशा!
सोचो जरा,, क्या है उनकी अभिलाषा!!
देता है उनको हर कोई दिलाषा !
नही सोचता वो उन्हिंका है खाता!!
कर दे अगर बंद देना ,'वो दाता !
कैसे जियेंगे हम सोचो मेरे भ्राता!!
आंखो मे आशु ................ !
करता है मेहनत ....................!!
कुछ तो करो हे ,मेरे विधाता !
नही रखो तुम उनकी जमीनों को प्यासा!!
सच यदि कहूँ ,बस तुम्ही हो उनकी एक आशा!
कर दो उनपर दया, हे मेरे विधाता !!
आंखो मे अंशु और मन मे है आशा!
करता है मेहनत और खाता है झांसा!!



these lines are dedicated to farmers ..........


me and my feelings......

निहारते हुए ये आँखे हुई है नम!
कभी तू एक झलक दिखालाजा सनम !!
कब तक यूँही तडपायेगा हमको!
कब तू गले से लगायेगा हमको!!
पता है तुझे तेरे बिन जी सकेंगे!
समुंदर का पानी पी सकेंगे!!
फिर क्यों दे रहा है हमको ये सजा!
तू बता दे आज हमको क्या है तेरी रजा!!
निहारते हुए.........
कभी टू एक झलक.....
व्याकुल तपन से तुझी को पुकारे !
ये बंजर पड़ी है अब तेरे सहारे!!
कि कभी तू तराश खायेगा इसपर!
उसी दिन बरस जाएगा तू इस पर !!
फ़िर खिल उठेगी ये फूलों की वादी!
हरा होगा दमन भरी होगी छाती!!
उसी दिन का मुझको भी है इंतजार !
धारा पर जिस दिन आएगी ये बाहर!!
निहारते
हुए ये आँखे हुई है नम!
कभी
तू एक झलक दिखालाजा सनम!!


this poem is dedicated to a..................!!